Kavita

Kavita-1
घार हिंडते आकाशी 


Kavita-2
मंजील अब दुर नही 

मंजील अब दुर नही थोडा इंतजार कर
पाना चाहता है तो
 खुद को
तयार कर
रूकना नही ये याद कर










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